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रीतिकाल के नामकरण की उपयुक्तता पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए |

Question: रीतिकाल के नामकरण की उपयुक्तता पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए |

Answer: रीतिकाल हिंदी साहित्य के इतिहास की दृष्टि से उत्तर मध्यकाल है | आचार्य रामचन्द्रशुक्ल ने इसे ‘रीतिकाल‘ नाम दिया क्योंकि इस काल में रीति ग्रंथों की रचना की प्रधानता अधिक है | रीति ग्रन्थ से तात्पर्य उन रचनाओं से है, जिनमे रस, छंद, अलंकार एवं नायिका भेद आदि के उदाहरण के रूप में कविताओं की रचना की जाती रही | डॉ. रामकुमार वर्मा ने इस काल में कलापक्ष की प्रधानता होने के कारण इसे ‘कलाकाल‘ कहा है | तथा आचार्य विश्वनाथप्रसाद मिश्र ने इसे ‘श्रृंगारकाल‘ कहा, क्योंकि इस काल में श्रृंगार रस की अधिकता थी, परन्तु आचार्य शुक्ल द्वारा किया गया नामकरण ‘रीतिकाल‘ ही हिंदी साहित्य जगत् में विशेष रूप से उल्लेखनीय है |

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