महात्मा गांधी का जीवन परिचय : Mahatma Gandhi Biography In Hindi

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (1869 -1948) : हमारे देश के राष्ट्र निर्मातों में महात्मा गाँधी जी को सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त है | राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में ही देश ने अहिंसा की लड़ाई जीतकर भारत को बिट्रिश साम्राज्य की गुलामी से मुक्त कराया | सत्य, अहिंसा, सेवा, मानवता तथा जीवन की व्यावहारिकता के प्रतीक इस महापुरुष का व्यक्तित्व एवं कृतित्व आज भी विश्वव्यापी है | उन्होंने अपनी आत्माकथा माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ में जीवन के सभी पहलू को स्पष्ट किया है | वर्ष 1948 में नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर दी।

Mahatma Gandhi Biography In Hindi

विषय-सूची

महात्मा गांधी का जीवन परिचय : Mahatma Gandhi Biography In Hindi

प्रस्तावना:

विसवी शताब्दी को जिस अनोखे महापुरुष ने सबसे अधिक प्रभावित किया था, वह थे – महात्मा गांधी जी | वे आज धरती पर नही है, किन्तु, सत्य, अहिंसा और प्रेम के सिद्धांतो पर आधारित उनका जीवन सन्देश आज भारत की सीमाओं से निकलकर सारे संसार को जीवन प्रदान कर रहा है | गांधी जी की माता धर्मनिष्ठ और साधु – स्वभाव की महिला थी | माता की आस्तिकता और सत्यपरायणता की गहरी छाप गांधी जी पर व्यापक रूप से पड़ी | अपने बचपन में उन्होंने सत्यवादी हरिश्चन्द्र नाटक देखा था और श्रवणकुमार नमक नाटक पढ़ा था | इन दोनों नाटको के आदर्शो का उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा | महात्मा गांधी जी भारत के एक महान राष्ट्र निर्माता थे |

जन्म – स्थान

अहिंसा के पुजारी और करूणा के अवतार महात्मा गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई० को गुजरात प्रदेश के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था |

गांधी जी के पिता

महात्मा गांधी जी के पिता का नाम करमचंद गांधी था | गांधी जी के पिता राजकोट में एक दीवान थे |

गांधी जी की माता

महात्मा गांधी जी की माता का नाम पुतलीबाई था | गांधी जी की माता धर्मानिष्ठ और शांत स्वभाव की महिला थी |

महात्मा गांधी का पूरा नाम

महात्मा गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था |

महात्मा गांधी की शिक्षा

गांधी जी की प्रारम्भिक शिक्षा राजकोट में हुई | 1887 ई० में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे वैरिस्टर की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैण्ड चले गये और 1891 ई० में वैरिस्टर बन कर भारत वापस आये | भारत लौटने पर उन्होंने अपनी वकालत आरम्भ की और कुछ दिन राजकोट एवं बम्बई में वकालत करने के पश्चात् एक मुकदमे की पैरवी के लिए 1893 ई० में वे दक्षिण अफ्रीका चले गए |

महात्मा गांधी का विवाह

मात्र तेरह वर्ष की उम्र में सन् 1883 ई० में गांधी जी का विवाह कस्तूरबा गांधी के साथ हो गया |

महात्मा गांधी की पत्नी

गांधी जी की पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था |

महात्मा गांधी के सिद्धांत

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के सिद्धांत सत्य और अहिंसा थे |

राजनितिक गुरु

महात्मा गांधी जी के राजनितिक गुरु गोपालकृष्ण गोखले थे |

महात्मा गांधी के पुत्र

महात्मा गांधी के पुत्र हरिलाल, मणिलाल, देवदास और रामदास थे |

दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी

दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने भारतीयों की दयनीय दशा देखी | वहाँ भारतीयों के साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया जाता था | गौरो और कालो के भेद ने गांधी जी के हदय में विद्रोह की ज्वाला उत्पन्न कर दी | वहां पर उन्हें भी कई बार अपमानित किया गया | यह सब देखकर उनका हृदय विद्रोह से भर उठा | उन्होंने वैधानिक ढंग से युध्द छेड़ दिया | इसके लिए उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा का अस्त्र अपनाया | उनके आन्दोलन का अनुकूल प्रभाव हुआ और दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को सम्मानपूर्ण जीवन मिला | इस प्रकार सफलता प्राप्त करके गांधी जी प्रसिध्दि के शिखर पर पहुँचे |

भारत में महात्मा गांधी

महात्मा गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में जनप्रिय हो चुके थे | भारतीय राजनीति उनका स्वागत करने के लिए तैयार खड़ी थी | उस समय लोकमान्य बालगंगाधर तिलक और गोपालकृष्ण गोखले राजनीति के मैदान में थे | उन्होंने गांधी जी का स्वागत किया और गांधी जी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानी बन गए | उन्होंने अहमदाबाद के पास के तट पर अपने आश्रम की स्थापना की और वही से भारत की कोटि – कोटि जनता का मार्गदर्शन करने लगे|

महात्मा गांधी का स्वतंत्रता आन्दोलन और जेल यात्राएं

महात्मा गांधी जी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए देशव्यापी आन्दोलन छेड़ दिया | उन्होंने चरखे को स्वतंत्रता का प्रतीक बनाया और अहिंसा को इस आन्दोलन का अस्त्र बनाया | स्वतंत्रता आन्दोलन के इस कर्मठ सिपाही को अनेक बार जेल – यात्राए भी करनी पड़ी | महात्मा गांधी जी ने सन् 1942 ई० में बम्बई अधिवेशन में नारा दिया अंग्रेजो भारत छोडो अब अंग्रेजो ने मन ही मन में समझ लिया था कि उन्हें भारत से जाना ही होगा | अंत में गांधी जी की नीति की विजय हुई और सन् 1947 ई० में भारत स्वतंत्र हुआ |

महान संत अथवा महात्मा गाँधी की मृत्यु

देश की आजादी को अभी एक वर्ष भी न बीता था कि 30 जनवरी 1948 ई० की संध्या को नाथूराम गोडसे नामक व्यक्ति ने अपने रिवाल्वर की गोलियों से गांधी जी की हत्या कर दी | इस प्रकार भारत का महान संत, पीड़ित मानवता का एकमात्र आश्रय और विश्व का महान व्यक्तिव संसार से विदा हो गया |

महात्मा गांधी के महान आदर्श

महात्मा गांधी जी धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे | वे अहिंसा के पुजारी थे, किन्तु उनकी अहिंसा में वीरता, निडरता तथा दृढ़ संकल्प विद्यमान थे | सत्य, अहिंसा और धर्म का राजनीति में प्रयोग करके गांधी जी ने एक अदभुत आदर्श प्रस्तुत किया | गांधी जी ने अपने इन्ही आदर्शो के बल पर ब्रिट्रिश साम्राज्य की नींव तक हिला दी | गांधी जी का ईश्वर में अटल विश्वास था | सत्य को उन्होंने ईश्वर का दूसरा रूप बताया है | उनकी कथनी और करनी में कोई भेद नहीं था | अत: उन्होंने धर्म को सदाचार का नाम दिया और सारे धर्मो में सामान भाव पैदा करने के लिए सत्याग्रह का सहारा लिया |

महात्मा गांधी द्वारा किये गये महत्वपूर्ण समाज – सुधार के कार्य

एक समाज – सुधारक के रूप में गांधी जी का योगदान अतुलनीय है | जातिवाद, छुआछूत, परदा – प्रथा, बहु – विवाह, नशाखोरी और साम्प्रादायिक भेदभाव जैसी बुराइयो को समाप्त करने के लिए गांधी जी ने निरंतर संघर्ष किया | जातिवाद और छुआछूत को मिटाने के लिए उन्होंने सबसे अधिक प्रयास किया और अछूतों को हरिजन शाब्दिक (अर्थ – हरि के जन) कहकर सामाजिक सम्मान दिलाया |

राष्ट्र निर्मातो में महात्मा गांधी जी का स्थान

महात्मा गांधी जी इस युग के महानतम पुरुष थे | उन्होंने शताब्दियों से सोए हुए भारतवर्ष को जाग्रत किया और देश में आत्मसम्मान की लहर दौड़ाई | उनका चरित्र केवल भारतवासियों के लिए ही नहीं अपितु विदेशियों के लिए भी अनुकरणीय है |

कवि की वाणी के रूप में हरिजनों के प्रति उनकी गहरी आस्था इस रूप में प्रकट होती है –

यदि हरिजन के छू लेने से,

मंदिर का है, कल्याण नहीं|

तो यही कहूँगा मंदिर में

बस पत्थर है, भगवान नहीं ||

महात्मा गांधी जी द्वारा चलाये गए महत्वपूर्ण आन्दोलन व सत्याग्रह

आन्दोलन व सत्याग्रहवर्ष
चाम्पारण सत्याग्रह आंदोलन1917
अहमदाबाद मजदूर आंदोलन1918
खेड़ा सत्याग्रह आंदोलन1918
खिलाफत आंदोलन1919
असहयोग आंदोलन1920
सविनय अवज्ञा आंदोलन1930
व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन1940
भारत छोड़ो आंदोलन व अगस्त क्रांति1942

रौलेट एक्ट (1919) :

भारत में बढ़ रही क्रांतिकारी गतिविधियों के दमन के लिए सरकार ने वर्ष 1917 में न्यायाधीश सिडनी रौलेट की अध्यक्षता में एक समिति गठित की | इसका उद्देश्य क्रांतिकारियों को कचलने के लिए एक प्रभावी योजना का निर्माण करना था | इसके सुझावों पर मार्च 1919 ई० में परित विधेयक रौलेट एक्ट के नाम से जाना गया |

रौलेट एक्ट के अन्य नाम:

रौलेक्ट एक्ट को बिना वकील, बिना अपील तथा बिना दलील का कानून भी कहा गया | इसे काला अधिनियम एवं आतकंवादी अपराध अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है |

नोट:- सम्पूर्ण देश में 6 अप्रैल 1919 ई० का दिन राष्ट्रीय अपमान दिवस के रूप में मनाया गया |

जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड (13 अप्रैल 1919 ई०):

रौलेट सत्याग्रह के दौरान पंजाब के दो लोकप्रिय नेताओं डॉ. सैफुदीन किचलू और डॉ० सत्यपाल की गिरफ़्तारी और ब्रिटिश दमन का विरोध करने के लिए 13 अप्रैल 1919 ई० को बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग हत्याकांड के नाम से जाना जाता है |

चौरी – चौरा कांड

  • उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित चौरी – चौरा नामक स्थान पर 5 फरवरी 1922 ई० को एक हिंसक घटना घटित हुई |
  • चौरी – चौरा काण्ड में भीड़ ने विरोध के रूप में पुलिस के 22 सिपाहियों को थाने में जिन्दा जला दिया |

महात्मा गांधी के प्रमुख आश्रम

फिनिक्स फार्मडरबन (दक्षिण अफ्रीका)1904 ई.
टॉलस्टाय फार्मजोहन्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका)1910 ई.
साबरमती आश्रमसाबरमती नदी (अहमदाबाद)1915 ई.
सत्याग्रह आश्रमकोचरब (अहमदाबाद)1915 ई.
अनाशक्ति आश्रमकौसानी (उत्तराखंड)1929 ई.
सेवाग्राम आश्रमवर्धा (महाराष्ट्र)1936 ई.

महात्मा गांधी की प्रमुख उपाधियाँ

उपाधिसमय/संबोधनकर्ता
कैसर – ए – हिन्द प्रथम विश्व युध्द के समय
भर्ती करने वाला सार्जेंट प्रथम विश्व युध्द के समय
भंगी शिरोमणिदक्षिण अफ्रीका के प्रवास के दौरान
कुली बैरिस्टर दक्षिण अफ्रीका के अंग्रेज मजिस्ट्रेट
कर्मवीरदक्षिण अफ्रीका के सहयोगी
सेवाग्राम का संतआश्रम के अतिथियों द्वारा
आधुनिक युग के अजात शत्रुडॉ. राजेन्द्र प्रसाद
मलंग बाबा कबायलियों द्वारा
बापू सी. एफ एंडूज और जवाहरलाल नेहरू
देशद्रोही फकीर / अर्ध्दनग्न फकीरविंस्टन चर्चिल
राष्ट्रपितासुभाष चन्द्र बोस
भिखारियों का राजा पं. मदन मोहन मालवीय
महात्मारवीन्द्रनाथ टैगोर
वन मैन बाउंड्री फोर्सलॉर्ड माउंटबेटन द्वारा

प्रमुख पुस्तकें

सत्य के साथ मेरे प्रयोग (आत्मकथा), इंडिया ऑफ माई ड्रीम्स, अनासक्त योग, हिंद स्वराज (1909 ई.), गीता माता, सप्त महाव्रत, (गांधी जी का वास्तविक दर्शन व पश्चिमी सभ्यता का विरोध), सुनो विधार्थियों

प्रमुख समाचार पत्र

  • द ग्रीन पैम्पलेट (14 अगस्त 1896, राजकोट)
  • इंडियन ओपिनियन (1903 ई., दक्षिण अफ्रीका में)
  • यंग इंडिया (1919 ई.)
  • हरिजन (1932 ई.)

महात्मा गांधी जी के द्वारा भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान कहे गये महत्वपूर्ण कथन

मैं देश के बालू से ही कांग्रेस से भी बड़ा आन्दोलन खड़ा कर दूँगा |

– महात्मा गांधी

भारत का विभाजन मेरी लाश पर होगा, जब तक मैं जीवित रहुँगा तब तक भारत का होने विभाजन नहीं दूंगा |

– महात्मा गांधी

यह एक ऐसा चेक था जिसका बैक पहले ही नष्ट होने वाला था |

– महात्मा गांधी

भारतीय संस्कृति पूरी तरह न हिन्दू है, न इस्लामी और न कुछ अन्य वह सबका संयोजन है |

– महात्मा गांधी

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