प्रोफेसर नीलरत्न धर का जीवन परिचय – Professor Nilratan Dhar Biography in Hindi

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इस आर्टिकल में हम प्रोफेसर नीलरत्न धर का जीवन परिचय पढेंगे, तो चलिए विस्तार से पढ़ते हैं प्रोफेसर नीलरत्न धर का जीवनी | Professor Nilratan Dhar Biography in Hindi.

प्रोफेसर नीलरत्न धर का जीवन परिचय | Professor Nilratan Dhar Biography in Hindi

प्रोफेसर नीलरत्न धर का जन्म 2 जनवरी 1892 में जसोर नामक कस्बे में हुआ था। यह कस्बा इस समय बांगला देश में है। इनके पिता का नाम प्रसन्न कुमार धर था जो एक वकील थे। इन्होने ने 1897 ई० में अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अपने ही कस्बे के जिला के स्कूल में प्रारम्भ की | उन्होंने हाई स्कूल से एम. एस. सी. तक के सभी कक्षाओं में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए | जुलाई 1913 में फेलों के रिसर्च के रूप में इनकी नियुक्ति कलकत्ता विश्वविद्यालय में हो गई।

प्रोफेसर नीलरत्न धर पहली बार 3 सितम्बर 1915 को यूरोप के दौरे पर भारत सरकार की छात्रवृत्ति पर गये। 1915 ई० के सितम्बर के अन्तिम सप्ताह में इन्होंने प्रोफेसर फिलिप्स के निर्देशन में डी.एस.सी. उपाधि के लिए कार्य करना प्रारम्भ किया और 18 माह की अवधि में ही इन्होंने अपना शोध कार्य पूरा कर लिया। मई 1917 ई० को लन्दन विश्वविद्यालय द्वारा इन्हें डी. एस. सी. की उपाधि प्रदान की गई।

जुलाई 1919 से प्रोफेसर नीलरत्न धर म्योर कालेज में अध्यापन करने लगे। 1926 में यूरोप के लिए रवाना हुए तथा कई देशों का भ्रमण किया। फिर स्वदेश लौटकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सेवा करने लगे। 1952 में इलाहाबाद के रसायन विभाग से अन्तिम रूप से सन्यास ले लिया।

प्रोफेसर नीलरत्न धर को उनके “फोटो केमिकल नाइट्रोन फिक्सेशन” तथा भूमि को उपजाऊ बनाने से सम्बन्धी शोध कार्य पर अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई। इनके निर्देशन में लगभग 130 लोगों को डी. फिल. तथा 20 लोगों को डी. एस. सी. की उपाधियाँ प्राप्त हुई। प्रोफेसर नीलरत्न धर ने 600 मूल शोध पत्रों को लिखा जो विश्व के किसी एक वैज्ञानिक द्वारा सम्भव नहीं हो सका है। वह अपने जीवन के अन्तिम समय तक शीलाधर इन्स्टीट्यूट के सम्मानित निदेशक थे। इनकी मृत्यु सन् 1986 में हुई।

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