सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय – Savitribai Phule Biography in Hindi

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प्रिये पाठक इस आर्टिकल में हम सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय पढेंगे, तो चलिए विस्तार से पढ़ते हैं सावित्रीबाई फुले का इतिहास (Savitribai Phule Biography in Hindi) जो परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही उपयोगी है। सावित्रीबाई फुले देश की प्रथम महिला शिक्षिका थी

सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय, Savitribai Phule Biography in Hindi
सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय

सावित्रीबाई फुले – आरम्भिक जीवन, जन्म, जन्म – स्थाल, माता, पिता, पति, शिक्षा, विचार, कार्य, शिक्षा में योगदान, मृत्यु, इतिहास, प्रश्न उत्तर आदि। जो परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही उपयोगी है।

सावित्रीबाई फुले का संक्षिप्त जीवन परिचय – Short Savitribai Phule information in hindi

सावित्रीबाई फुले फोटोसावित्रीबाई फुले फोटो
पूरा नामसावित्रीबाई फुले
जन्म 3 जनवरी, 1831
मृत्यु 10 मार्च 1897 (उम्र 66 वर्ष)
जन्म स्थाननायगांव , महाराष्ट्र
पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे
माता का नाम लक्ष्मी
पति का नाम ज्योतिबा फुले
प्रसिद्धिभारत की पहली शिक्षिका, कर्मठ समाजसेविका, शिक्षिका और कवियत्री

सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय – Savitribai Phule Biography in Hindi

आरम्भिक जीवन

भारत की भूमि पर जन्मी सावित्रीबाई फुले एक महान समाजसेविका, शिक्षिका और कवियत्री के रूप में भारत को एक नवीन आशा की किरण प्रदान करती है | वो यह बताती है कि हमें किसी से घृणा नही करनी चाहिए सदैव सभी से प्रेम करना चाहिए और उनकी सहायता करनी चाहिए | इस समाजसेविका के उदित होने पर भारत की धरती खुशी से तर हो गई |

जन्म

सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था।

जन्म – स्थाल

सावित्रीबाई फुले का जन्म महाराष्ट्र के नायगांव में हुआ था।

माता – पिता (Savitribai Phule mother-father)

सावित्रीबाई फुले के पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मी था।

पति का नाम

इनके पति का नाम ज्योतिराव गोविंदराव फुले था।

सावित्रीबाई फुले का विवाह (Marriage of Savitribai Phule)

सावित्रीबाई फुले का विवाह 1840 में ज्योतिराव फुले के साथ सम्पन्न हुआ जो महाराष्ट्र के निवासी थे सावित्रीबाई फुले की उम्र तब 9 वर्ष की थी और इनके पति समाज सुधारक थे।

सावित्रीबाई फुले की शिक्षा (Education of Savitribai Phule)

सावित्रीबाई फुले को बड़ी कठिनाइयो का सामना करना पड़ा उनके जमाने में महिलाओं को पढ़ने से रोका जाता था तथा अगर कोई महिला जबरदस्ती पढ़ने के लिए कदम उठती तो उनकी बहुत बेज्जती की जाती थी इसी प्रकार सावित्रीबाई फुले जब पढ़ने जाने लगी तो रास्ते में लोग उन पर गोबर, पत्थर, कचरा, मिट्टी फेकते थे लेकिन सावित्रीबाई अपने पास एक थैले में में एक साफ साड़ी ले लेती और स्कूल पहुँच कर गन्दी साड़ी को बदल लेती थी। वह बहुत विद्वान थी। और उन्होंने अपनी शिक्षा को जारी रखा।

सावित्रीबाई फुले के विचार व कार्य (Thoughts and Works of Savitribai Phule)

सावित्रीबाई फुले कार्य व विचार

  • सावित्रीबाई फुले एवं इनके पति ज्योतिराव फुले दोनों लोगो का एक विशेष कार्य था कि समाज की सेवा करना और दलित तथा महिलाओं को शिक्षा की ओर अग्रसत करना और दबे, कुचले लोगो को समाज में सामान अधिकार दिलाना तथा समाज में अन्य वर्गों के साथ कन्धेरने कन्धा मिलाकर चलने का अवसर प्रदान करना (सावित्रीबाई फुले और ज्योतिराव फुले ने मिलकर वर्ष 1854 -55 में भारत में साक्षरता मिशन भी शुरू किया था )
  • उनका उद्देश्य था कि समाज में विधवा विवाह करवाना तथा बाल विवाह समाप्त करना तथा छुआछूत को मिटाना और सत्यशोधक विवाह प्रथा शुरू करना (जिसमे कोई दहेज नहीं लिया जाता)।
  • सावित्रीबाई फुले मानवतावाद, स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, तर्कवाद और शिक्षा की सदैव वकालत करती थी। और इन्होने देश के पहले किसान स्कूल की स्थापना की थी वर्ष 1852 में जो दलित बालिकाओं के लिए है।
  • इन्होने कन्या शिशु हत्या को रोकने के लिए भी पहल किये तथा इन्होने उनके लिए एक आश्रम भी खोला ताकि उनकी रक्षा की जा सके और अभियान भी चलाये।
  • उनके द्वारा स्थापित संस्था “सत्यशोधन समाज” ने वर्ष 1876 और वर्ष 1879 के अकाल में अन्य सप्र चलाया और इकठ्ठा करके आश्रम में रहने वाले 2000बच्चो को खाना खिलाने की व्यवस्था की।

सावित्रीबाई फुले का शिक्षा में योगदान

  • विवाह के बाद अपने पति के सहयोग से सावित्रीबाई फुले ने 1848 में पुणे में भिड़े वाड़ा नामक स्थान पर लड़कियों के लिये भारत का पहला विद्यालय खोला।
  • इन्हें भारत की पहली महिला शिक्षक के रूप में याद किया जाता है | सावित्रीबाई फुले भारत की पहली बालिका विद्यालय की प्राचार्या बनी थी तथा एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पांच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए तत्कालीन सरकार ने इन्हें सम्मानित भी किया।
  • सावित्री बाई फुले उस दौर सिर्फ खुद नहीं पढ़ी बल्कि दूसरी लड़कियों को भी पढ़ने का भी बंदोबस्त किया।
  • 3 जनवरी 2017 को उनके 189 वे जन्मदिवस पर गूगल ने उनको गूगल डूडल प्रसिद्ध करके उन्हें अभिवादन किया है।
  • वह एक कवायित्री थी जिसे मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है।
Savitribai Phule painting, सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय
Savitribai Phule painting

सावित्रीबाई फुले की मृत्यु (Death of Savitribai Phule)

10 मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का मृत्यु हो गया प्लेग महामारी में सावित्रीबाई प्लेग के मरीजो की सेवा करती थी। एक बच्चे की सेवा करने के कारण उन्हें भी प्लेग बिमारी का शिकार होना पड़ा जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गयी।

सावित्री बाई फुले पर प्रकाशित साहित्य (Literature published on Savitribai Phule)

  • क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले (शैलजा मोलक – लेखिका)
  • हाँ मैं सावित्रीबाई फुले (अझिम प्रेमजी विद्यापीठ – प्रकाशक) हिंदी
  • सावित्री बाई फुले (मंगला गोखले – लेखिका)
  • साध्वी सावित्रीबाई फुले (फुलवंता झोडगे – लेखिका)
  • त्या होत्या म्हणून (डॉ० विजया वाड – लेखिका) आदि।

भारतीय डाक टिकट पर सावित्रीबाई फुले (1998 ई०)

भारतीय डाक द्वारा 10 मार्च 1998 को सावित्रीबाई फुले सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया गया।

भारतीय डाक टिकट पर सावित्रीबाई फुले : सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय

संबंधित प्रश्न (FAQs) – सावित्रीबाई फुले का जीवन परिचय

सावित्रीबाई फुले के प्रमुख कार्य क्या थे?

समाज में विधवा विवाह करवाना तथा बाल विवाह समाप्त करना तथा छुआछूत को मिटाना। और इन्होने देश के पहले किसान स्कूल की स्थापना की थी वर्ष 1852 में जो दलित बालिकाओं के लिए है। सावित्रीबाई फुले ने 1848 में पुणे में भिड़े वाड़ा नामक स्थान पर लड़कियों के लिये भारत का पहला विद्यालय खोला।

भारत में प्रथम महिला शिक्षक कौन है?

सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षक थी।

सावित्रीबाई फुले की शादी कब हुई थी?

सावित्रीबाई फुले की शादी 1840 में ज्योतिराव फुले के साथ हुई थी।

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